नमाज़ के अर्कान, वाजिबात और सुन्नतें क्या हैंॽ
नमाज़ के अर्कान चौदह (14) और उसके वाजिबात आठ (8) हैं। जबकि नमाज़ की सुन्नतें बहुत-सी है, जिनमें से कुछ का संबंध कथन से है और कुछ का संबंध कार्य से। रुक्न और वाजिब के बीच अंतर यह है कि रुक्न जानबूझकर या गलती से छोड़ देने से माफ नहीं होता है, बल्कि उसको करना ज़रूरी होता है। जहाँ तक वाजिब का संबंध है, तो वह भूलकर छोड़ने से माफ हो जाता है और सह्व का सजदा करके उसकी भरपाई की जाती है।